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GEETA PART SIX

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"GEETA PART SIX" इस आर्टिकल में हम गीता के 6 अध्याय का अध्ययन करेंगे जिसमें श्री भगवान, अर्जुन को समझाते हुए कहते हैं कि:- श्री भगवान कृष्ण बोले :- जो पुरुष कर्मफल का आश्रय न लेकर करने योग्य कर्म करता है, वह संन्यासी तथा योगी है और केवल अग्नि का त्याग करने वाला सन्यासी नहीं है तथा केवल क्रियाओं का त्याग करने वाला योग्य नहीं है हे अर्जुन! जिसको संन्यास ऐसा कहते हैं, उसी को तू योग जान, क्योंकि संकल्पों का त्याग न करने वाला कोई भी पुरुष योगी नहीं होता। योग में आरूढ़ होने की इच्छा वाले मननशील पुरुष के लिए योग की प्राप्ति में निष्काम भाव से कर्म करना ही हेतु कहा जाता है। और योगारूढ़ को जाने पर उस योगारूढ़  पुरुष का जो सर्वसंकल्पों का अभाव है, वहीं कल्याण में हेतु कहा जाता है। जिस काल में न तो इंद्रियों के भागों में और न कर्मों में ही आसक्त होता है, उस काल में सर्वसंकल्पों का त्यागी पुरुष योगारूढ़ कहा जाता है। अपने द्वारा, अपना संसार खुद ही उद्धार करे और अपने को अधोगति में ना डाले; क्योंकि मनुष्य आप ही तो अपना मित्र है और आप ही अपना ...

Bhakti

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"Bhakti" आजकल के इस दौर में नास्तिक और आस्तिक सभी प्रकार के लोग हैं और पहले भी थे। लेकिन सोचना हमारा इस बात का होता है की जब हमारे सामने कोई भी चुनौती होती है, तो हम उसको कितना समझ पाते हैं लेकिन यहां बात भक्ति की हो रही है तो हमें देखना यह होता है कि भक्ति की परिभाषा क्या है, भक्ति को हम किस दृष्टिकोण से देखते हैं। यह बहुत मायने रखता है ईश्वर ने हर सांसारिक वस्तु को बनाया है।और संपूर्ण संसार इस परमात्मा में ही समाया हुआ है, हर प्राणी के सामने दो ही रास्ते होते हैं सत्य और असत्य कुछ लोग इस श्रेणी में भी आते हैं कि वह यह समझने की कोशिश नहीं करते हैं कि सत्य क्या है,  कुछ सत्य के सिवा जानते ही नहीं उनको असत्य पर चलना पसंद नहीं आता ,कुछ लोग असत्य में रहते हुए भी एक सच्चाई का ढोंग रचते हुए दिखावा करते हैं कुछ लोग दोनों रास्तों को अपनाकर अपने लिए एक  मुसीबत ही खड़ी कर लेते हैं क्योंकि दोनों रास्तों को अपनाकर उसे सत्य का पुण्य ना मिलते हुए उसे उस पाप का भागी ही बनना पड़ता है। क्योंकि जिस प्रकार एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है उसी प्रकार तुम...

Narendra Modi and Narendra Modi's Tea

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"Narendra Modi and Narendra Modi's Tea"  नरेंद्र मोदी सूक्ष्म परिचय:-  नरेंद्र मोदी एक बहुत ही गरीब परिवार से हैं। जिनका जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद मोदी था और माता का नाम हीराबेन मोदी था। इनकी पत्नी का नाम जशोदाबेन है। यह हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का एक सूक्ष्म परिचय है। लेकिन मुख्य उद्देश्य नरेंद्र मोदी जी की चाय के ऊपर लिखना है । चाय को सभी वर्गों के लोग पीते हैं। वैसे तो गरीब और अमीरी का चक्कर चलना एक स्वाभाविक है लेकिन असलियत में गरीब वही है जो अपनी सोच का विस्तार नहीं करता, जो व्यक्ति अपनी सोच अर्थात विचारों का धनी है वह गरीब नहीं हो सकता। वह, कैसा भी कठिन रास्ता हो अपना मार्ग बना ही लेता है और यही महान व्यक्तित्व की पहचान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी की चाय और चाय की विशेषतायें:- हिंदुस्तान की चाय का आज दुनिया में कोई मुकाबला नहीं कर सकता क्योंकि हमें इसके पीछे के रहस्य को समझना होगा वैसे तो चाय, दूध ,पत्ती, मीठा डालकर बनाई जाती ...

GEETA-BHAG FIVE

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"geeta bhag five" अर्जुन बोले :- हे कृष्ण! आप कर्मों के संन्यास की और फिर कर्म योग की प्रशंसा करते हैं। इसलिए इन दोनों में से जो एक मेरे लिए भलिभांति निश्चित कल्याणकारी साधन हो, उसको कहिये।। श्री भगवान बोले: - कर्मसन्यास और कर्मयोग- ये दोनों ही परमकल्याणकारी हैं।  परन्तु इन दोनों में भी कर्मसन्यास से कर्मयोग साधन में सुगम होने से श्रेष्ठ है। हे अर्जुन! जो पुरुष न किसी से द्वेष करता है और न किसी की आकांक्षा करता है,वह कर्मयोगी सदा संन्यासी ही समझने योग्य है; क्योंकि राग-द्वेषादि द्वन्द्वौ से रहित पुरुष सुखपूर्वक संसार बंधन से मुक्त हो जाता है। उपर्युक्त संन्यास और कर्मयोग को मुर्ख लोग पृथक-पृथक फल देने वाले कहते हैं न कि पंडितजन,क्यौंकि दोनों में से एक में भी सम्यक् प्रकार से स्थित पुरुष दोनों के फलस्वरूप परमात्मा को प्राप्त होता है। ज्ञानयोगियौं द्वारा जो परमधाम प्राप्त किया जाता है, कर्मयोगियों द्वारा भी वही प्राप्त किया जाता है। इसलिए जो पुरुष ज्ञानयोग और कर्मयोग को फल रुप में एक देखता है।वह यथार्थ देखता है। परन्तु हे अर्जुन! कर्मयोग के बिना...

GEETA-BHAG FOUR

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" geeta-bhag--four " Shree krishana ne Arjun ko kaha:- श्री भगवान बोले :-                           मेंने इस अविनाशी योग को सूर्य से कहा था; सूर्य ने अपने पुत्र वैवस्वत मनु से कहा और मनु ने अपने पुत्र राजा इक्ष्वाकु से कहा।।                              हे परंतप अर्जुन! इस प्रकार परंपरा से प्राप्त इस योग को राजर्षियौं ने जाना; किंतु उसके बाद वह योग बहुत काल से इस पृथ्वी लोक में लुप्तप्राय हो गया।।                              तू मेरा भक्त और प्रिय सखा है, इसलिए वही यह पुरातन योग आज मैंने तुझको कहा है; क्योंकि यह बड़ा ही उत्तम रहस्य है अर्थात गुप्त रखने योग्य विषय है। अर्जुन बोले :-                     आपका जन्म तो अर्वाचीन अभि हाल का है और सूर्य का जन्म तो बहुत पुराना है अर्थात कल्प के आदि में हो चु...