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Diwali Festival

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"Diwali Festival"  By"Nagesh Excellent Education" (Nagesh) "Diwali Festival" By Nagesh Chopra Diwali Festival :- दिवाली फेस्टिवल हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जिसके लिए हिंदू व्यक्ति गंगा स्नान करके और त्योहार के इष्ट देवताओं की पाठ पूजा करके त्यौहार का आनंद लेते हैं त्यौहार हमको सकारात्मकता प्रदान करता है। और हमको संदेश देता है एक सही मार्ग सही दिशा में चलने के लिए। दिवाली फेस्टिवल सभी लोग मिलजुल कर बनाते हैं और एक दूसरे के लिए उपहार देते हैं। और अच्छे शिक्षाओं को ग्रहण करते हैं। और बुराइयों को छोड़ने का संकल्प लेते हैं इस दिवाली फेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य है।बुराइयों का नाश करना और सत्य मार्ग पर चलकर अपने सत्य चरित्र निर्माण करना ही होता है। हमारे महत्वपूर्ण त्यौहार दिवाली फेस्टिवल का रहस्य ईश्वर अर्थात प्रभु राम से जुड़ा हुआ है। परिचय(Introduction) :-                                      सनातन धर्म संस्कृति का दिवाली त्यौहार एक महत्वपूर्ण त्यौहार ह...

Power of mind

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"power of mind" Power of Mind अपने अवचेतन मन कि शक्ति को पहचानें हम सभी असीमित दौलत के अथाह समुद्र में रहते हैं। आपका अवचेतन मन आपके चेतन विचारों के प्रति बहुत संवेदनशील होता है , यह चेतन विचार सांचे की तरह काम करते हैं , जिनमें आपके अवचेतन का असीमित ज्ञान, बुद्धि, जीवन शक्ति और ऊर्जा प्रवाहित होती है। अगर आप सांचे को अधिक सकारात्मक बना दें तो आपको इस असीमित ऊर्जा से अत्यधिक लाभ हो सकता है।     अधिकांश महान वैज्ञानिकों , कलाकारों, कवियों, गायकों, लेखकों और आविष्कारकों को चेतन और अवचेतन मन की कार्यविधि की गहरी समझ थी। इसी वजह से उन्हें अपने लक्ष्य हासिल करने की शक्ति मिली।     एक बार महान ओपेरा गायक एनरिको, मंच पर जाने से घबरा रहे थे। डर के मारे उनके गले की मांसपेशियां ऐँठ गई थी, ऐसा लग रहा था कि जैसे उनके वाकतंतु को लकवा मार गया हो और वह बेकार हो गए हो। वह मंच के पीछे गायक की पोशाक पहने खड़े थे , और उनके चेहरे पर पसीना बह रहा था। कुछ ही पल बाद उन्हें हजारों प्रशंसकों की भीड़ के सामने मंच पर जाकर गाना था। ...

Drashti

"Drashti" 💐दृष्टिकोण 💐 जीवन का महान पुरस्कार और उच्च भाग्य यही है कि मनुष्य किसी विशेष काम के लिए जन्म ले, ताकि उसमे लगा रहकर प्रसन्नता और सफलता हासिल करता रहे। यह प्रकृति का नियम है कि मनुष्य जिस कार्य को सर्वाधिक पसंद करता है, उसे उसी में विशेषता हासिल होती है। कितने लोग प्राप्त करते है जीवन के महान पुरस्कार और उच्च भाग्य को, उनकी संख्या कम ही होती है। वे ही लोग 2उच्च भाग्य का पुरस्कार पाने का अधिकार पाते है, जिनका सकारात्मक दृष्टिकोण होता है। सकारात्मक दृष्टिकोण वाले इंसान को संसार की कोई भी शक्ति उसे दुखी नही बना सकती। जीवन की सफलता और विफलता, सुख-दुःख यह सब व्यक्ति के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है, यदि आपका दृष्टिकोण नकारात्मक है तो जीवन का अँधेरा पक्ष उभरकर सामने आयेगा, निराशा ही निराशा दिखाई देने लगेगी और तनाव ही तनाव उभरेगा। इसका एक कारण यह भी है कि मानव अपने स्वभाव व रुचियों को जानने का प्रयास नहीं करता। जब तक इंसान अपने स्वभाव व रुचियों से पैदा हुए दृष्टिकोण का मूल्यांकन करके यह नहीं जान लेता कि यह सकार...

Sleep disorder

"sleep disorder" अनिंद्रा ( Sleep Disorder)  अनिंद्रा आज के समय में आम बीमारी होती जा रही है जीवन का सुख और चैन समाप्त होगा तो अनिंद्रा की बीमारी धर दबाेचेगी और आवश्यकता से अधिक पाने की इच्छा, जीवन के प्रति असंतोष तथा भौतिक सुख सुविधाओं के प्रति अंधी आस्था ने मनुष्य के जीवन में इतनी अधिक गतिशीलता उत्पन्न कर दी है कि किसी साधारण व्यक्ति को भी जीने के लिए नाना प्रकार के पापड़ प्रतिदिन बेलने पड़ते हैं जब हमारा चेतन मन सो जाता है तो मस्तिष्क और शरीर दोनों निंद्रा अवस्था में चले जाते है अनिंद्रा कोई रोग नहीं है यह रोग का लक्षण है जब चेतन मस्तिष्क में कोई विचार सक्रिय रहता है तो नींद नहीं आती ।नींद के लिए मस्तिक में मौजूद निंद्रा केंद्र की सक्रियता आवश्यक है किंतु चेतन मन के सक्रिय रहने से निंद्रा केंद्र निस्प्रभावी हो जाते है लगातार अनिंद्रा की स्थिति बने रहने से मस्तिष्क व शरीर को आराम नहीं मिल पाता जिससे मन मस्तिष्क स्नायु मंडल व शरीर थक जाता है परिणाम स्वरूप संपूर्ण सरीर व मस्तिष्क क्रियाओं पर बुरा प्रभाव पड़ता है अनिंद्रा शरीर व मन की अनेक बीमारियों क...

Science of mantra

"science of mantra" पूनम जी ने सवाल किया है कि जैसा हम सोचते हैं वैसा होता तो नहीं है पूनम जी मैं आपकी बातों से सहमत हूं क्योंकि यदि यह सब इतनी जल्दी होता तो सब कुछ अस्त-व्यस्त हो जाता स्वयं चलने वाले विचार भी अपना प्रभाव डालते हैं लेकिन उसमें इतना समय लग जाता है कि आप यह भी भूल जाते हैं कि कभी आपके मन में ऐसे विचार आए थे मैं इस बात को पूरी तरह स्वीकार करता हूं की हर कोई मंत्रों का पूर्ण लाभ प्राप्त नहीं कर सकता है नकारात्मक स्थिति में विचार शक्ति जो एक समय बाद मंत्रों का रुप ले लेती है आपने देखा होगा कि सदमे में इंसान की जान तक चली जाती है यह कितनी अजीब बात है कि शारीरिक रूप से स्वस्थ, न कुछ हानिकारक खिलाया फिर भी इंसान की मृत्यु हो गई विचार भावना से उत्पन्न शक्ति श्रंखला बनाती हुई धीरे धीरे ऐसे इंसान की जीवनी शक्ति को खा जाती है और इंसान सहज अपने जीवन को छोड़ देता है सदमे में इंसान कहता है कि वह मेरा बहुत प्रिय था मैं उसके बिना जी नहीं सकता वह इन विचारों का मंत्र बना लेता है और फिर ऐसी ही घटना घट जाती है और यदि  नकारात्मक घटना  पूरे परिवार के साथ घट...

Science of Upvash

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"Science of Upvash" भारतीय संस्कृति में व्रत का बड़ा ही महत्व है लेकिन जिन विचारों के साथ व्रत किया जाता था आज वह अपने आधार से हट गया है व्रत एक साधना है जो हठयोग से जुड़ी हुई है हठयोग में प्रकृति से हटकर या विपरीत कार्य करके ध्यान किया जाता है या अपने इष्ट देवता को मनाया जाता है यह ध्यान की एक अद्भुत क्रिया है क्योंकि सहज योग में किसी भी लक्ष्य के लिए ध्यान लगाना कठिन होता है बार बार ध्यान अन्य विचारों पर चला जाता है  किंतु जब इंसान व्रत करता है तो वह भूखा रहता है इस भूख के कारण उसका पूरा ध्यान स्वयं पर बना रहता है और व्रतधारी व्रत के प्रारंभ में जो संकल्प लेता है वह संकल्प को बार बार दोहराता रहता है जिससे उसकी एकाग्रता संकल्प पर बनी रहती है और उसका संकल्प सिद्ध हो जाता है यही व्रत का सही नियम है जैसे हठयोगी दो पैरों के स्थान पर एक पैर पर खड़ा हो जाता है वह जानबूझकर अप्राकृतिक क्रिया करता है दर्द के कारण दर्द के कारण  उसका पूरा ध्यान उस एक अंग पर आ जाता है वह अपने ज्ञान और साधना के बल पर उस दर्द का संबंध अपने इष्ट देवता से जोड़ देता है एक स...

Aagyaa chakra

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"Aagyaa chakra" असीम शक्तियों का भंडार है आपका आज्ञा चक्र हाँ दोस्तों ये सच बात है मनुष्य का शरीर असीम शक्तियों का भंडार है। अनगिनत पावर  प्लांट है इसमें। इस पावर प्लांट या पावर हॉउस को समझना बहुत जरुरी है ताकि हम इसका भरपूर लाभ सके। यूँ तो पूरे शरीर में जितनी कुंडलिनी चक्र है उनमें आज्ञा चक्र का विशेष नाम आता है। यह चक्र मस्तक के बीच दोनों भौहों के मध्य में विराजमान है, जहाँ पर सब लोग बिंदी या तिलक लगाया करते हैं। आज्ञा चक्र के साधक सदा निरोग, सम्मोहक और त्रिकालदर्शी माने जाते हैं। कुंडलिनी के इसी आज्ञा चक्र को योग साधनाओं दवारा जागृत करके किसी भी स्त्री /पुरुष का भुत भविष्य देखा जा सकता है। वर्तमान/तत्काल वह क्या सोंच रहा है यह आसानी से पता लगाया जा सकता है। चुकि पुरे शरीर में स्थित, लौह तत्व की अधिकांश मात्र आज्ञा चक्र पर ही स्थित होता है इस कारण चुम्बकीय प्रभाव भी यही पर होता है। अतः जब इस चक्र का जब हम ध्यान करते हैं तो हमारे शरीर में एक विशेष चुम्बकीय उर्जा का निर्माण होने लगता है उस उर्जा से हमारे अन्दर के दुर्गुण ख़त्म ...

Energy

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"Energy" कहते हैं कि सूरज भी, जो कि महान ऊर्जा का भंडार है और जो करोड़ों वर्ष का है, निरंतर रिक्त हो रहा है, और चार हजार वर्षों के भीतर वह समाप्त होने वाला है। सूर्य समाप्त होगा, क्योंकि उसके पास फिर विकीरित करने को ऊर्जा नहीं बचेगी। सूर्य प्रतिदिन मर रहा है, क्योंकि उसकी किरणें उसकी ऊर्जा को ब्रह्मांड की सरहदों की ओर--अगर उसकी कोई सरहदें हैं--बहा ले जा रही हैं, उसकी ऊर्जा बाहर जा रही है। केवल मनुष्य अपनी ऊर्जा को दिशा देने और रूपांतरित करने की क्षमता रखता है। अन्यथा मृत्यु स्वभाविक घटना है, प्रत्येक चीज मरती है। केवल मनुष्य अमृत को, चिन्मय को जान सकता है। तो तुम इस पूरी चीज को एक नियम में सीमित कर सकते हो। अगर ऊर्जा बाहर जाती है तो मृत्यु उसका परिणाम है, और तब तुम कभी न जानोगे कि जीवन क्या है! तुम धीरे-धीरे मरना भर जानोगे, जीवित होने की प्रगाढ़ता का तुम्हें पता नहीं चलेगा। अगर किसी चीज की भी ऊर्जा बाहर जाती है तो उसकी मृत्यु अपने आप घटित होती है। और अगर तुम ऊर्जा की दिशा बदल देते हो, बाहर बहने की बजाय वह भीतर की ओर बहने लगे तो र...