Drashti

"Drashti"

💐दृष्टिकोण 💐

जीवन का महान पुरस्कार और उच्च भाग्य यही है कि मनुष्य किसी विशेष काम के लिए जन्म ले, ताकि उसमे लगा रहकर प्रसन्नता और सफलता हासिल करता रहे। यह प्रकृति का नियम है कि मनुष्य जिस कार्य को सर्वाधिक पसंद करता है, उसे उसी में विशेषता हासिल होती है। कितने लोग प्राप्त करते है जीवन के महान पुरस्कार और उच्च भाग्य को, उनकी संख्या कम ही होती है। वे ही लोग 2उच्च भाग्य का पुरस्कार पाने का अधिकार पाते है, जिनका सकारात्मक दृष्टिकोण होता है। सकारात्मक दृष्टिकोण वाले इंसान को संसार की कोई भी शक्ति उसे दुखी नही बना सकती। जीवन की सफलता और विफलता, सुख-दुःख यह सब व्यक्ति के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है, यदि आपका दृष्टिकोण
नकारात्मक है तो जीवन का अँधेरा पक्ष उभरकर सामने आयेगा, निराशा ही निराशा दिखाई देने लगेगी और तनाव ही तनाव उभरेगा। इसका एक कारण यह भी है कि मानव अपने स्वभाव व रुचियों को जानने का प्रयास नहीं करता। जब तक इंसान अपने स्वभाव व रुचियों से पैदा हुए दृष्टिकोण का मूल्यांकन करके यह नहीं जान लेता कि यह सकारात्मक है या नकारात्मक। इस संसार में पशु-पक्षी भी अपनी रुचियों को जानते है। गीदड़ कभी उड़ने का प्रयास नहीं करता। आगे बंद गेट को देखकर, तेज़ गति से दौड़ता हुआ घोड़ा भी रुक जाता है। सामने गहरी खायी हो तो आपस में लड़ते हुए कुत्तों में भी इतनी समझ होती है कि वह भी एकदम रुक जाते है।

लेकिन मनुष्य एकमात्र ऐसा प्राणी है जो प्रकृति के विरुद्ध चलने का प्रयास करता है। प्रकृति उसे बार-बार सावधान करती है, और संभल जाने के लिए कहती है, परन्तु वह चलता रहता है। अंत में उसका परिणाम यह होता है कि उसके हाथ कुछ भी नहीं आता और उसे पछताना पड़ता है। मिली असफलता और पछतावा उसके अंदर नकारात्मकता पैदा करती है, उसी को मानव दोहराता रहता है। क्योंकि इंसान अपनी असफलता को दोहराकर दूसरे लोगों से हमदर्दी पाना चाहता है, और यह समझता है कि दूसरे लोग मेरी मदद कर देंगे और शायद मैं सफल हो जाऊंगा। पर उसे सफलता तो तभी मिलेगी जब वह सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएगा। उसके लिए उसको यह सुनिश्चित करना होगा कि मैं अब नकारात्मक, असफलता-वादी, बुरे या निराशा-जनक विचार नहीं रखूँगा। अपने मस्तिष्क को बार-बार यह याद दिलाये मेरे अंदर धैर्य, सदभावना, मानसिक शांति, प्रेम, ख़ुशी, आनंदमय जीवन जीने के लिए पैदा हुआ हूँ। जब आप सुबह अपनी आँखें खोले तो खुद से कहे कि मैं आज पूरा दिन खुश और सफल रहूँगा। और आज से ही सही कार्य, प्रेम, धैर्य, सदभावना, मानसिक शांति को चुनता हूँ। इस सकारात्मक घोषणा को आप मन ही मन दोहराकर, इन वाक्यों में दिलचस्पी लेने लगेंगे तो आपको खुशियां और सफलता मिलने लगेगी और इसके लिए परमात्मा को धन्यवाद करते रहे क्योंकि उन्हीं की कृपा से ये सकारात्मक विचार आपके अवचेतन मन में स्थान बना लेंगे। और आपको अच्छे परिणाम मिलने लगेंगे। आपके मन में खुश रहने की सच्ची इच्छा होनी चाहिए। बिना इच्छा और कल्पना के कुछ भी हासिल नहीं होता। इच्छा, कल्पना, और आस्था (अटल विश्वास) के साथ की गयी कामना को साकार होने की वास्तविकता को महसूस करे, यह साकार हो जाएगी, ख़ुशी और सफलता शांत मस्तिष्क की देन है। जो सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने से ही मिलती है


"Drashti"

In English


 The great prize and high fortune of life is that  man should be born for a particular work, so that he can continue to live happily and succeed in it.  It is a law of nature that the work that man likes most, he gets the specialty in it.  How many people receive great rewards of life and high fortune, their number is very less.  Only those people who have a positive outlook get the right to get the prize of 2 high fortune.  No power of the world can make a person with positive outlook unhappy.  Success and failure of life, happiness and sorrow all depends on the attitude of the person, if your attitude is negative then the dark side of life will emerge, disappointment will start to appear frustration and stress will be stress.  One reason for this is that human beings do not try to know their nature and interests.  Until a person evaluates an attitude born of his nature and interests, he does not know whether it is positive or negative.  Animals and birds also know their interests in this world.  Jackal never attempts to fly.  Seeing the gate ahead, the horse running at a high speed also stops.  If you eat deep in front, dogs fighting with each other have so much understanding that they also stop completely.


 But man is the only creature who tries to walk against nature.  Nature warns him again and again, and tells him to go steady, but he keeps going.  In the end, the result is that nothing comes to his hand and he has to repent.  Failure and remorse create negativity in him, the same thing is repeated by humans.  Because a person wants to sympathize with other people by repeating their failure, and understands that other people will help me and maybe I will succeed.  But he will get success only when he adopts positive attitude.  For that, he has to make sure that I will no longer have negative, failure-inducing, bad or disappointing thoughts.  Remind your brain again and again that I am born to live patience, goodwill, mental peace, love, happiness, joyful life.  When you open your eyes in the morning, tell yourself that I will be happy and successful all day today.  And from today I choose the right work, love, patience, goodwill, mental peace.  By repeating this positive declaration in your mind, you will start taking interest in these sentences, then you will start getting happiness and success and thank God for this, because by his grace these positive thoughts will make a place in your subconscious mind.  And you will start getting good results.  You must have a true desire to be happy.  Nothing is achieved without desire and imagination.  Feel the reality of wishing, imagining, and wishing with faith (unwavering faith), it will become real, happiness and success are the result of calm mind.  Which comes only by adopting a positive attitude.

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