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Showing posts with the label Motivation Education

Thinking

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"Thinking" (विचार शक्ति) हर क्रिया की मैनूफ्स्टेशन हमारे मस्तिष्क में चलने वाले विचारों से होती है विचार मस्तिष्क में दो प्रकार से चलते हैं पांचो इंद्रियों से मिलकर मस्तिष्क में स्वत् उत्पन्न होने वाले विचार दूसरे स्वयं अपनी इच्छा से बनाए हुए विचार अक्सर इंसान जब अपनी इच्छा से विचार चलाता है तो उन विचारों में डर और संशय को शामिल कर लेता है क्योंकि इंसान का मन यह कह रहा होता है कि ऐसे कैसे हो सकता है ऐसे होना संभव नहीं तुम नया घर कैसे खरीद सकते हो तुम्हारे पास तो इतने अधिक रूपए भी नहीं और फिर भविष्य में वही परिणाम हमें प्राप्त होता है जरा सोचिए ह्यूमन साइकोलॉजी ने तो पूर्ण रूप से अपने सिद्धांतों पर कार्य किया बाद में हम कहते हैं कि अरे यह सिद्धांत काम नहीं करते तो जरा सोचें कि कितने समय हमारे मन में पॉजिटिव विचार चलें और कितने समय नेगेटिव विचार माना इंसान को किसी कार्य में परिणाम प्राप्त करने के लिए सौ प्रतिशत ऊर्जा की जरूरत है जो इंसान पॉजिटिव सोचने पर भी परिणाम को प्राप्त नहीं कर पाता तो समझिए वह ( - 100) में था और अब जीरो पर आ गया है ऐसे इंसा...

Game

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"Game" ब्लू व्हेल गेम -  नहीं   (आत्महत्या) आपने ब्लू व्हेल गेम के बारे में न्यूज़पेपर WhatsApp या Facebook पर पढ़ा होगा कुछ दिन पहले सिरसा से ब्लू व्हेल गेम का केस मेरे पास आया यह एक 12 साल का लड़का था जो छठी क्लास में पड़ता है इस केस को स्टडी करने पर मुझे जो पता चला वह मैं आपके सामने रखना चाहता हूं 12 साल का अजय (काल्पनिक नाम) छठी कक्षा में पढ़ता है कंप्यूटर या मोबाइल पर गेम खेलने का बहुत अधिक शौकीन है एक दिन उसने ब्लू व्हेल गेम को लॉगइन किया जब एडमिन ने पूछा अभी आप गेम को छोड़ सकते हैं गेम शुरू होने के बाद न तो आप गेम को छोड़ सकते हैं और ना ही मैं छोड़ने दूंगा उसने गेम खेलना शुरु कर दिया अजय की मम्मी ने बताया कि जब इसे टास्क दिया गया हाथ ब्लेड से काटने का तो इसने रेड पेन से निशान बना कर फोटो खींच कर भेज दिया कलाई पर ब्लेड से ब्लू व्हेल बनाने का टास्क मिला तो इसने मेहंदी से ब्लू व्हेल बनाकर फोटो खींचकर भेज दिया इस तरह जहां तक संभव हो सका यह एडमिन को बेवकूफ बनाने की कोशिश करता रहा कठिन टास्क आने पर वह टास्क पूरे नहीं कर पा रहा था एडमिन की तरफ से ध...

Motivat for children

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'motivat for children' बच्चों को अच्छी आदतें देना अर्थात अच्छे संस्कार देना अर्थात बच्चों को महान बनाने की अध्यात्मिक विधि अर्थात गर्भस्थ शिशु को  दिव्य चेतना देने की अध्यात्मिक विधि प्रियंका जी ने कॉमेंट द्वारा जानना चाहा है कि "क्या गर्भ में पल रहे बच्चे को या दूध पीने वाले बच्चे को भी ज्ञान दिया जा सकता है" प्रियंका जी आपका सवाल बहुत ही अच्छा है बच्चा जितना छोटा होता है उसमें किसी भी माध्यम से विचारों को ग्रहण करने की क्षमता अधिक होती है जब बच्चा मां के पेट में होता है तो मां का रोम-रोम उसकी आंख नाक कान होते हैं उसका मस्तिष्क होते हैं उसके देखने सुनने व समझने की शक्ति हजारो लाखो गुना बढ़ जाती है इसलिए बच्चा मां के पेट में कहीं अधिक जल्दी सीख और समझ सकता है जिस कार्य को सीखने के लिए या परफेक्ट होने के लिए सालों या महीने लगते हैं वह कार्य बच्चा गर्भ में घंटों में सीख सकता है यही वह विधि थी जिस का प्रयोगिक रूप भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को सिखाया और अर्जुन ने उसका प्रयोग अपनी पत्नी पर किया जब वह गर्भवती थी अभिमन्यु उसके गर्भ में था ...

Narendra Modi and Narendra Modi's Tea

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"Narendra Modi and Narendra Modi's Tea"  नरेंद्र मोदी सूक्ष्म परिचय:-  नरेंद्र मोदी एक बहुत ही गरीब परिवार से हैं। जिनका जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम दामोदरदास मूलचंद मोदी था और माता का नाम हीराबेन मोदी था। इनकी पत्नी का नाम जशोदाबेन है। यह हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का एक सूक्ष्म परिचय है। लेकिन मुख्य उद्देश्य नरेंद्र मोदी जी की चाय के ऊपर लिखना है । चाय को सभी वर्गों के लोग पीते हैं। वैसे तो गरीब और अमीरी का चक्कर चलना एक स्वाभाविक है लेकिन असलियत में गरीब वही है जो अपनी सोच का विस्तार नहीं करता, जो व्यक्ति अपनी सोच अर्थात विचारों का धनी है वह गरीब नहीं हो सकता। वह, कैसा भी कठिन रास्ता हो अपना मार्ग बना ही लेता है और यही महान व्यक्तित्व की पहचान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी की चाय और चाय की विशेषतायें:- हिंदुस्तान की चाय का आज दुनिया में कोई मुकाबला नहीं कर सकता क्योंकि हमें इसके पीछे के रहस्य को समझना होगा वैसे तो चाय, दूध ,पत्ती, मीठा डालकर बनाई जाती ...

MOTIVATION FOR WIFE AND HUSBAND

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"Motivation for wife and husband" MOTIVATION 🌷♦🌷♦🌷♦🌷 *👉🏿लड़की अपने ससुराल मैं कैसे खुश रहे* *1 लड़की अपनी माँ के साथ पुलिस थाने  मे  अपने पति एवं ससुराल वालो के खिलाफ शिकायत करने जाती है !* *वहां की आफिसर लड़की से पुछती  है ...* *क्या तुम्हारा पति  मारता हैं ?* *क्या वो तुमसे अपने माँ  बाप  से कुछ मांग के लाने को कहता है ?* *क्या वो तुम्हे खाने  पहनने  को  नहीं देता* *क्या  तेरे ससुराल वाले कुछ भला बुरा कहते है* *क्या वो तेरा  ख्याल नहीं रखता ?* *इंन सब सवालो का जवाब लड़की ने  नही में दिया !* *इस पर लड़की की माँ बोली की मेरी बेटी बहुत परेशान है !* *वो इसे टोरचेर करते है !* *अफसर समझ गयी !* *उसने लड़की की माँ से पुछा बहन जी  क्या  आप घर में दही ज़माती  हो ?* *लड़की की माँ नें कहा हाँ !* *अफसर : तो जब दही ज़माती हो तो बार बार दही को ऊंगली मार कर जाचती हो ?* *लड़की की माँ : जी अगर बार बार ऊंगली मार के जाचुंगी तो दही  कहा जमेगा ?* *वो तो खराब हो जाएगा* *अफसर :...

STORY OF MOTIVATION (B)

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Story of motivation (B) किताब का अध्ययन तो हम कर रहे हैं लेकिन उस अध्ययन से प्राप्त शिक्षा को अपने अंदर नहीं उतार रहे हैं पर हम को समझना होगा कि जो हम किताबों में पढ़ते हैं उसको हमें अपने अंदर उतारना भी है ना कि केवल उसको रट कर पास होना है इसी प्रकार जो शिक्षा देने वाले हैं उनको किताबी ज्ञान देने के साथ साथ नैतिक शिक्षा का ज्ञान देना भी बहुत जरूरी है नैतिक शिक्षा अर्थात सामाजिक सेवा ,सामाजिक ज्ञान की शिक्षा देना बहुत जरूरी है यदि हमने पढ़ाई को रट कर केवल नौकरी के उद्देश्य से अपनी कक्षाओं को पास किया तो वह केवल शिक्षा व्यापार मात्र है वह पढ़ाई लिखाई केवल इस तरह है किमानो पानी तो है पर प्यास नहीं बुझ रही है शिक्षा के साथ साथ संस्कारों का भी होना बहुत जरूरी है सद्गुणों का होना बहुत जरूरी है । इसलिए किसी व्यक्ति को शिक्षित होना तभी शोभा देता है जब वह छल कपट से दूर, बुराइयों से दूर हो और सत्य मार्ग का अनुसरण करते हुए परिश्रम करते हुए अपनी शिक्षा प्राप्ति को करें। Blogger MOTIVATION BY NAGESH CHOPRA  हमारी शिक्षा प्राप्ति के स्रोत जितने सकारात्मक होंगे उतने ही अधिक...

MOTIVATION STORY THREE

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"Story of motivation" MOTIVATION BY NAGESH CHOPRA बहुत समय पहले जापान में कोई दो सौ वर्ष पहले एक बहुत अद्भुत संन्यासी हुआ। उस संन्यासी की एक ही शिक्षा थी कि जागो! नींद छोड़ दो। उस संन्यासी की खबर जापान के सम्राट को मिली। सम्राट जवान था, अभी नया नया राजगद्दी पर बैठा था। उसने उस फकीर को बुलाया। और उस फकीर से प्रार्थना की, मैं भी जागना चाहता हूं। क्या मुझे जागना सिखा सकते है? उस फकीर ने कहा, सिखा सकता हूं,लेकिन राजमहल में नहीं, मेरे झोपड़े पर आ जाना पड़ेगा! और कितने दिन में सीख पाएंगे, इसका कोई निश्चय नहीं है । यह एक-एक आदमी की तीव्रता पर निर्भर करता है; एक-एक आदमी के असंतोष पर निर्भर करता है कि वह कितना प्यासा है कि सीख सके । तुम्हारी प्यास कितनी है; तुम्हारी अतृप्ति कितनी है; तुम्हारी डिसकटेंट कितना है; तो तुम सीख सकते हो । और उस मात्रा में निर्भर होगा कि तुम कितने जल्दी सीख सकते हो । वर्ष लग सकते हैं, दो वर्ष लग सकते हैं, दस वर्ष लग सकते हैं । और मेरी शर्त है कि बीच से कभी आने नहीं दूंगा; अगर सीखना हो तो पूरी तैयारी करके आना । और साथ में यह भी बता ...